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बद्रीनाथ के पास टूटा ग्लेशियर, वैज्ञानिकों ने कहा- अंदर से खोखले हो रहे पहाड़

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Glacier breaks near Badrinath, scientists say mountains are hollowing out from within
Glacier breaks near Badrinath, scientists say mountains are hollowing out from within

उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम के पास कंचनगंगा में ग्लेशियर टूटने की घटना सामने आई है, हालांकि कोई नुकसान नहीं हुआ है. पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालय में बर्फबारी का पैटर्न बदल रहा है; अब जनवरी-फरवरी के बजाय मार्च-अप्रैल में ज्यादा बर्फ गिर रही है, जिससे ग्लेशियर कमजोर हो रहे हैं.

उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम से महज 4 किलोमीटर दूर कंचनगंगा के ऊपर ग्लेशियर टूटने की एक सनसनीखेज घटना सामने आई है. गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है. हर साल नीचे की तरफ खिसकने वाला यह ग्लेशियर गर्मी की शुरुआत और तापमान बढ़ते ही तेजी के साथ पिघलने लगता है. चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार ने बताया कि स्थानीय प्रशासन पूरी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है.

वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों के ताजा शोध में एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है. पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार, हिमालय क्षेत्र में बर्फबारी का पैटर्न पूरी तरह बदल रहा है. आमतौर पर बर्फबारी के महीने माने जाने वाले जनवरी और फरवरी की तुलना में अब मार्च और अप्रैल में ज्यादा बर्फ गिर रही है. इसका सीधा असर पहाड़ों के वाटर बैंक कहे जाने वाले ग्लेशियरों पर पड़ रहा है. इस बदलाव के कारण ट्री लाइन (पेड़ों के उगने की भौगोलिक सीमा) भी लगातार ऊपर की तरफ खिसक रही है. यह शोध जर्मनी की प्रतिष्ठित ‘एप्लाइड जियोमेटिक्स’ शोध पत्रिका में भी प्रकाशित हुआ है.

वैज्ञानिकों के मुताबिक, हिमालय में सर्दियों की तुलना में गर्मियों में ज्यादा बर्फबारी होने की मुख्य वजह ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbance) में आई असमानता है. सर्दियों के मौसम में पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर होने से बारिश और बर्फबारी में भारी कमी आ रही है. गर्मियों के महीनों में इसके सक्रिय होने से असमय बर्फबारी, तेज बारिश, ओलावृष्टि और प्राकृतिक आपदाओं के खतरे कई गुना बढ़ गए हैं. वाडिया संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. पंकज चौहान के अनुसार, बागेश्वर के पिंडारी और कफनी ग्लेशियर की तरह पूरा मध्य हिमालय इस समय इसी मौसमी बदलाव से जूझ रहा है.आंकड़ों के अनुसार, पिंडारी और कफनी ग्लेशियर क्षेत्र में इस साल सबसे अधिक 158 सेंटीमीटर बर्फ अप्रैल के महीने में गिरी है, जबकि मार्च में यह आंकड़ा 84 सेंटीमीटर था. इसके विपरीत, जनवरी में महज 96 सेंटीमीटर बर्फ पड़ी और दिसंबर में सिर्फ ऊपरी इलाकों में चार बार हल्की बर्फबारी हुई.

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