सोशल मीडिया में फैलाई गई फर्जी खबरों ने मणिपुर की दरिंदगी को दिया जन्म!

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Fake news spread in social media gave birth to the brutality of Manipur!
Fake news spread in social media gave birth to the brutality of Manipur!

मानसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले इंसानियत को शर्मसार करने वाला मणिपुर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में एक आदमियों के समूह ने दो महिलाओं को नग्न करके सड़क पर परेड कराई और उनका सामूहिक बलात्कार भी किया। परेड कराते वक्त कई लोगों ने महिलाओं के प्राइवेट पार्ट के साथ बेहत गंदे तरहे से छेड़छाड भी की। इस वीडियो को जिसने देखा उसकी रुह कांप गयी। हर कोई वीडियो में दिखने वाले दरिंदों के खिलाफ सजा की मांग कर रहा था।

 

आखिर क्यों दिया गया इस हैवानियत को अंजाम

मणिपुर के कांगपोकपी जिले में महिलाओं को नग्न करके घुमाने वाली वीडियो जैसे ही सामने आयी लोगों में गुस्से का गुबार फैल गया। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी इस पर अपना आक्रोश व्यक्त किया। सरकार, विपक्ष और जनता समान रूप से गुस्से में है। भयावह वीडियो में भीड़ द्वारा कुकी समुदाय की दो महिलाओं को नग्न करके सड़क पर घुमाते दिखाया गया। इस मामले में दर्ज की गई एफआईआर में कहा गया है कि एक महिला के साथ क्रूरतापूर्वक सामूहिक बलात्कार किया गया था।

 

फर्जी खबर को सच मानकर बदले में दिया गया दरिंदगी को अंजाम

सोशल मीडिया पर कई तरह की फेक खबरें चलाई जाती है। मणिपुर में भी ऐसा ही हुआ। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में हुए एक रेप की खबर सोशल मीडिया पर मणिपुर में हुए रेप की तरह फैलाई गई। इस खबर से लोगों के मन में बदले की भावना ने जन्म लिया और भयानक घटना को आदमियों की भीड़ ने अंजाम दिया।

 

मणिपुर का अहित चाहने वालों ने फर्जी खबर फैलाई कि मणिपुर में एक विशेष समुदाय की महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया। प्लास्टिक शीट में लिपटी एक महिला की तस्वीर प्रसारित की गई जिसमें दावा किया गया कि यह मणिपुर की महिला है। हालांकि, बाद में पता चला कि उक्त दुष्कर्म दिल्ली में हुआ था। इसी वजह से भीड़ ने कांगपोकपी में एक समूह के पांच लोगों का अपहरण कर लिया। यह घटना पूर्वोत्तर राज्य में हिंसा भड़कने के एक दिन बाद 4 मई को कांगपोकपी जिले में हुई थी।

दिल दहला देने वाली मणिपुर घटना

पुलिस शिकायत के अनुसार अनुमानित 800 से 1,000 लोगों ने, अत्याधुनिक हथियारों से लैस होकर, बी. फीनोम गांव में धावा बोल दिया, जिससे व्यापक विनाश और लूटपाट हुई। इस हिंसा के दौरान घर जला दिए गए और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। माना जा रहा है कि हमलावर मैतेई समूह से जुड़े हुए हैं। हमले की अफरा-तफरी के दौरान, दो पुरुषों और तीन महिलाओं सहित पांच ग्रामीण पास के जंगल में भागने में सफल रहे।

 

बाद में उन्हें नोंगपोक सेकमाई पुलिस टीम ने बचा लिया, लेकिन पुलिस स्टेशन ले जाते समय भीड़ ने उनका अपहरण कर लिया, जिससे उन्हें और अधिक पीड़ा हुई। उनमें से एक व्यक्ति को क्रूर भीड़ ने तुरंत मार डाला। जैसा कि एफआईआर में बताया गया है, तीनों महिलाओं को नग्न होने के लिए मजबूर किया गया। 21 साल की एक महिला के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। जब उसके 19 वर्षीय भाई ने हस्तक्षेप करने का प्रयास किया, तो उसे मार दिया गया।

 

दो आरोपी गिरफ्तार

मामले में अब तक दो गिरफ्तारियां हो चुकी हैं – उनमें से एक वह व्यक्ति है जिसे परेशान करने वाले वीडियो में हरे रंग की टी-शर्ट पहने देखा गया था। मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि एक अन्य आरोपी को आज बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।18 मई को शिकायत दर्ज की गई थी, जिसे बाद में 21 जून को एफआईआर में बदल दिया गया। एन बीरेन सिंह ने कहा कि सरकार अपराधियों के खिलाफ “मृत्युदंड” पर विचार कर रही है।

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